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प्रोजैक्ट (दंत रक्षक)

कहावत है दांत गए स्वाद गया, आंखे गई जहान गया। दांत हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। दांतों की बीमारी छह वर्ष के बच्चे से लेकर 60 वर्ष के बुजुर्ग तक को हो सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इस बात को लेकर चेताया है कि भारत में तंबाकू तथा सिगरेट के लगातार बढ़ रहे चलन के कारण भविष्य में दांतों की बीमारियां तथा मुंह का कैंसर बढ़ेगा। इसके बावजूद यह देखने में आया है कि लोग दांतों की बीमारियों के प्रति गंभीर नहीं हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की गाइडलाइन को मानते हुए प्रयोग फाउंडेशन ने प्रोजैक्ट दंत रक्षक शुरू किया। इस प्रोजैक्ट के तहत ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों में समय-समय पर विशेषज्ञ डाक्टरों की टीमों के सहयोग से ओरल कैंसर स्क्रीनिंग कैंप तथा दंत जांच कैंप का आयोजन किया जाता है।
प्रत्येक कैंप में औसतन 150 से 200 लोगों की जांच की जाती है। इसके अलावा तंबाकू व सिगरेट पीने वाले लोगों के लिए विशेषज्ञ डाक्टरों के लैक्चर का भी आयोजन किया जाता है। इस अभियान में अब तक करीब दस हजार लोग प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से शामिल हो चुके हैं। शिविर में शामिल होने वाले लोगों को समाज सेवियों की मदद से मुफ्त ब्रश व पेस्ट दिया जाता है। 
इन शिविरों के दौरान चंडीगढ़ स्थित 32 मेडिकल कालेज के डाक्टरों द्वारा लोगों को जागरूक किया गया। जिसके परिणाम स्वरूप अब तक करीब 100 लोग जहां बीड़ी सिगरेट छोडऩे का प्रण ले चुके हैं वहीं करीब नौ लोगों में धूम्रपान की आदत के चलते कैंसर के लक्ष्ण देखने को मिले हैं। प्रयोग फाउंडेशन की टीम द्वारा इन लोगों को परामर्श देकर उपचार के लिए प्रेरित किया गया है।

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